Gabriell 

  हमें सामाजिक यश के लिए नहीं चित्रकारी करनी चाहिए ; हमें आत्म ज्ञान को गहरा करने के लिए चित्रकारी करनी चाहिए......

22 मार्च 1956 टेमिस्कोटा में जन्में गैबरेल लेवोई एक पेशेवर शैक्षिक कलाकार थे।वे अंतरर्राष्ट्रीय आर्ट अकादमी द्वारा प्रमाणित कलाकार थे, और उन्होंने कलाकारी खुद से ही सीखी थी। ऐसे पूर्वनिर्धारित नाम और वास्तव में एक आध्यात्मिक दूरदर्शी दृष्टिकोण रखने वाले गैबरेल विश्व के लिए प्रतीकात्मक चित्रकारी का एक नया नाम थे।. 

 उनका हर एक कैनवास उनकी आध्यात्मिक यात्रा की कहानी बताता है।उनके अनुसार हम जो कुछ भी बनाते हैं वो बताता है की हम कैसे हैं।गैबरेल चित्रों का उपयोग खुद पर प्रकाश डालने के लिए करते हैं।क्यूबेक में विनम्रतापूर्वक रहते हुए गैबरेल लिओनडिएर क्षेत्र में पले बढ़ें।बचपन से ही उनकी चित्रकला को देखकर लगता था की ये उनको प्राकृतिक रूप से विरासत में मिली है। 1980 के दशक में चित्रकारी के प्रति उनके प्यार को सबसे पहले पोरट्रेचर में सराहा गया ।इस पहचान के बाद भी गैबरेल को अपने अंदर एक खालीपन सा महसूस होता रहा , जीवन को गहराई से समझते हुए उनके जीवन में कई बदलाव आते गए ।यहीं से उनके करियर में एक नया मोड़ आ गया औऱ उनके सामने एक नया रास्ता खुल गया जो उन्हें रचनात्मकता के एक नए रास्ते पर ले गया।

अपनी प्रतिभा में बढ़ते आत्मविश्वास और आध्यात्म की ओर बढ़ते कदम से उन्होंने अपनी नई सोच अपनी बनाई गई पेंटिंग में डाले जो बहुत सी परिकथाओं को बता रहा था और उनकी आकांक्षाओं को उनकी कलाकारी में देखा जा सकता था।ये अनुभव कई महीनों तक चलता रहा और उनके जीवन में सबसे ज्यादा खुलासे इसी दौरान हुए।उनके विचारों को अभिव्यक्त करने के लिए उन्होंने ऑयल एवं एक्रिलिक पेंटिंग का भरपूर उपयोग किया।उनके व्यक्तिगत शोध और कलाकारी की सहजीवता ने उनके अंदर एक अद्भुत क्षमता का विकास किया और सबके सामने वो क्षमता प्रदर्शित हुई।

   अपनी आत्मा के गुणों को आप कला द्वारा प्रकट कर सकते हैं......

अपनी दूरदर्शिता और प्रतिकात्मक विश्लेषण से गैबरियल को यह समझ आया की स्कूल में उनकी चौकीदार की नौकरी असल में उनकी यादों को शुद्ध कर रही हैं और उनकी अध्यात्म शक्ति को और मज़बूत कर रही हैं।अपनी प्रतिभा को और निखारने के अलावा उनके सामने आर्थिक स्थिति ठीक रखने की भी चुनौती थी जिससे उनकी ज़िंदगी चलती है।एक निजी स्कूल में गैबरिएल ने कई वर्षों तक चौकीदारी का काम किया।अपने काम में गैबरियल को स्कूल के चारों मंज़िलों में कमरे, गैलरी, और बाथरूम भी साफ करने होते थे।

इतने सालों में मुझे नहीं पता था की इस काम का मेरे भविष्य पर क्या असर पड़ेगा।जब मैंने प्रतिकात्मक भाषा पढ़नी शुरु की तब मुझे पता चला कि असल में ट्राली ले आना ले जाना, स्कूल में सफाई करना , सामान स्वच्छ करने की अपेक्षा मुझे अपने अंदर की सफाई करनी है, अपने अंदर के स्कूल की सफाई करनी है, अपने अंदर छुपे शिक्षक-छात्र क्षमता की सफाई करनी है।शुरुआत में मेरे अहंकार को काफी कष्ट हुआ, खासकर तब जब वहां के कुछ शिक्षक वो लोग थे जो पहले मेरे सहपाठी रह चुके थे।वहां लोग जो मेरे बारे में सोचते थे, जिस तरह से वे मेरी ओर देखते थे मुझमें हीनता ग्रसित होती थी, लोगों से मेरा जुड़ाव नहीं हो पा रहा था।अपने काम में मैंने गहरा ध्यान लगाना शुरु कर दिया,गहराई से विश्लेषण करना शुरु किया और उसे प्रतिबिंबित करने लगा।रोज शाम को मैं भगवान से बातें करने लगा उनसे अपने भविष्य के बारे में चर्चा करता।उनसे इतनी बातें करने से मेरे अंदर आध्यात्म का एक जाल सा बनने लगा।अपने दिल और अपनी आत्मा से मैं ये बताने के लिए बैचेन हो गया की असल में मैं क्या हूं।यही मेरा सपना था , मेरे दिल की इच्छा थी।फिर एक दिन अचानक मेरे जीवन में एक बदलाव आया, जो मुझे कला की दुनिया की ओर ले गया और मुझे चैकीदारी की नौकरी छोड़ने के लिए मुक्त किया।

ये नई साझेदारी बेहद कम समय तक चली लेकिन उनके भविष्य और उनके पेशेवर कलाकार बनने के लिए ये साझेदारी एक ऊंची छलांग साबित हुई।गैबरेल ने इन घटनाओं को ईश्वर की तरफ से तोहफा समझा,ये एक सुनहरा मौका था जिसका गैबरिएल को कई वर्षों तक इंतज़ार था।इस नई प्रेरणा ने उनपर जादू सा कर दिया था,जिसका सीधा असर उनके जीवन और उनकी कला पर पड़ रहा था।करीब 8 सालों तक अपने अंदर की गहराई से सफाई करने के बाद गैबरिएल ने खुद को एक नए कार्यक्रम के प्रति समर्पित कर दिया।उनकी किस्मत ने उनके लिए ये फैसला लिया।स्वर्ग से मिले तोहफे को वे अब दूसरों से बांटते थे और उनके सपने सच में बदल गए थे....

आज गैबरिएल, टरबिओन में स्थित अपने स्टूडियो में काम करते हैं,जहां वो अपनी पेंटिंग में अपनी प्रतिभा और प्रेरणा को प्रस्तुत करते हैं। लेकिन उनके उत्साह में सब से ऊपर सहज ज्ञान युक्त पेंटिंग रही है।

बाद में उनकी यूसीएम पब्लिशिंग से नई साझेदारी हुई।इस नई साझेदारी का बहुत बहुत धन्यवाद, गैबरिल के काम को एक नया विस्तार मिला।यूसीएम की सीडी और किताबों के कई कवर गैबरिएल ने बनाए और उनमें से कई बेहद प्रसिद्ध हुईं।पब्लिशिंग कंपनी और कलाकार ने मिलकर कई साझा प्रोजेक्टों में काम किया।अबतक गैबरिएल ने 65 ग्रीटिंग कार्ड, 8 पोस्टर, 3 कैलेंडर और 24 लैमिनेट तैयार किए हैं साथ ही उन्होंने बच्चों के लिए परिकथाएं भी बनाई हैं, इसके अलावा और भी कई प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है।हर वर्ष क्यूबेक और यूरोप में कई प्रदर्शिनियां भी लगती हैं।     

सहज ज्ञान युक्त पेंटिंग ने पूरी तरह से कला और जीवन के प्रति मेरे दृष्टिकोण को ही बदल दिया है...... 

गैबरिएल के कार्यों का विस्तार पूरे विश्व में हो रहा है और वो नई पीढ़ीयों को कला की अंदरूनी सुंदरता को पहचानने के लिए प्रेरित कर रही है।अपनी कला को उच्चतम शिखर तक पहुंचाने की लालसा से गैबरिएल हर दिन कला में नए आविष्कार करते आएं हैं और दूसरे कलाकारों को भी ऐसा करने की वे प्रेरणा दे रहे हैं।उनके कला के प्रयोगों और अनुभवों से कला का नवीनीकरण होता आया है।  

मुझे यकीन है कि मेरे अंदर आए बदलावों को मेरी पेंटिंग में देखा जा सकता है, जिनकी ओर देख कर दूसरे भी प्रेरित होते हैं,इसलिए एक कलाकार के ये ध्यान रखना चाहिए कि उनकी कलाकारी एक उत्तरायदित्व है जिसे उन्हें अपनी कला मेंपूरा दिखाना है....

पिछले कुछ महीनों में गैबरिएल की प्रतिभा को चारों तरफ से सराहा जा रहा है ,उन्होंने अबतक कई प्रतिष्ठित पुरस्कार पाए हैं।अंतर्राष्ट्रीय कला अकादमी द्वारा उन्हें पेशेवर शैक्षणिक कलाकार के रूप में मान्यता मिली है।इसके अलावा विभिन्न आर्ट गैलरियों में उनके लिए कई मौके इंतज़ार कर रहे हैं।

गैबरिएल का कहना है की ये प्रतिभा उनके लिए अनमोल तोहफा है और वे उसका सम्मान करते हैं।एक चित्रकार के रूप में वे कला को हर किसी तक पहुंचाना अपना कर्तव्य मानते हैं।उनकी खुली मानसिकता का धन्यवाद करना चाहिए जिसने दूसरों का सम्मान और गलतिया करने के अधिकार को मान्यता दी है और जिसकी झलकियां उनकी चित्रकारी में देखने को मिलती है।उनकी कला कक्षाएं और कार्यशालाओं में एक अलग ही तरह की कला समझने को मिलती है जिसको सहज ज्ञान युक्त कला का नाम दिया गया है।उनकी शिक्षा की सफलता इसमें है की वे हर किसी के विचारों को सुनते हैं और उसका स्वागत करते हैं।

कला में उनका प्रतीकात्मक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण ही उनको कला क्षेत्र में एक अलग पहचान दिला पाया है।उनका हर एक कैनवस उनकी आध्यात्मिक यात्रा का वर्णन करते हैं।उनके छात्रों का मानना है कि कभी कभी गैबरिएल का साथ कला से ज्यादा आध्यात्मिक हो जाता है।

  मेरे आध्यात्मिक कार्यों को मैं धन्यवाद देता हूँ और अपने ध्यान औऱ गहराई से अपने सपनों को जानने के बाद ये कह सकता हूं हम वही बन जाते हैं जैसा हम सोचते हैं। इसलिए मैं वही चित्रित करता हूं जो मैं बनना चाहता हूं.....

अकसर जब वो खुद को भुलाकर अपने अंदर ही रहते हैं तो कुछ नया निकल कर सामने आता है।ऐसे में सबकुछ अपने काबू में रखने की इच्छा खत्म हो जाती है और ग्रहणशीलता बढ़ जाती है।समय रुक जाता है, क्षमता बढ़ जाती है औऱ आत्मविश्वास का नवीनीकरण हो जाता है।ये एक जादुई अनुभव है जिसमें पूरा कैनवस रंगों से भर जाता है और आकृतियां खुद ब खुद बनती जाती हैं।

 कभी कभी मुझे महसूस होता है की चित्रकारी आपकी किस्मत है जो आपको कैनवस पर दिखती नहीं है, पर उसकी छाप होती है।दूसरे शब्दों में कहा जाए तो उसे पहले ही विवेक के उच्च स्तर पर चित्रित किया जा चुका है। ऐसा लगता है जैसे काम का संदेश पहले से ही तय है और एक शक्ति उसे रास्ता दिखा रही है,..... एक ताकत, एक शक्ति जो हमसे भी बड़ी है.....

उनका भीतरी अनुसंधान और चित्रकारी के बीच सहजीवन महान काम को जन्म देता है।

   हर प्रतीक का अपना एक अर्थ है।अलग अलग कलाओं को देखकर लोग चित्रकला के बारे में अपने विचार देते हैं जो उनकी खुद की सोच का प्रतिबिंब होता है। कला और जिंदगी के प्रति मेरा नज़रिये को सहज ज्ञान युक्त चित्रकला ने बिल्कुल बदल दिया।मैंने ये सीखा है की हमें बिना किसी बंधन में बंधे काम करना चाहिएबिल्कुल मुक्त होकर ताकि हमारी असली क्षमता बाहर निखर कर आए....